Saturday, August 29, 2026
English edition Join Group Now

India

प्रवासी पक्षियों का सुरक्षित आश्रय बना कोपरा जलाशय

May 21, 2026 Source: Civic Sutra

Join Now
प्रवासी पक्षियों का सुरक्षित आश्रय बना कोपरा जलाशय
प्रवासी पक्षियों का सुरक्षित आश्रय बना कोपरा जलाशय
*कोपरा जलाशयः छत्तीसगढ़ का पहला रामसर स्थल बना पर्यावरण संरक्षण की मिसाल* *जैव विविधता, जल संरक्षण और जनभागीदारी का अनूठा संगम* धनंजय राठौर (संयुक्त संचालक) अशोक कुमार चंद्रवंशी (सहायक जनसंपर्क अधिकारी) छत्तीसगढ़ का पहला रामसर स्थल कोपरा जलाशय आज पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता संवर्धन और सामुदायिक सहभागिता का प्रेरणादायक मॉडल बनकर उभर रहा है। “जैव विविधता के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस 2026” की थीम “स्थानीय स्तर पर कार्य, वैश्विक प्रभाव” को यह जलाशय वास्तविक रूप में साकार कर रहा है। सुबह के शांत वातावरण में प्रवासी पक्षियों की मधुर आवाजें और जलाशय के आसपास आजीविका से जुड़े ग्रामीणों की गतिविधियां प्रकृति और मानव जीवन के गहरे संबंध को दर्शाती हैं। कोपरा जलाशय वर्षों से क्षेत्र के लोगों के लिए जल, मत्स्य पालन, कृषि और पर्यावरणीय संतुलन का महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। *मुख्यमंत्री के नेतृत्व में संरक्षण कार्यों को मिली नई गति* मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा जैव विविधता संरक्षण, आर्द्रभूमि विकास और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। जल स्रोतों के संरक्षण, वृक्षारोपण, वन्यजीव सुरक्षा और सामुदायिक भागीदारी से जुड़े कई अभियान प्रदेश में संचालित किए जा रहे हैं, जिनका सकारात्मक प्रभाव कोपरा जलाशय जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में दिखाई दे रहा है। *स्थानीय समुदाय निभा रहे अहम भूमिका* वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की जैव विविधता राज्य की अमूल्य धरोहर है और इसके संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कोपरा जलाशय यह संदेश देता है कि जब शासन और समाज मिलकर प्रकृति संरक्षण का संकल्प लेते हैं, तब पर्यावरण सुरक्षा के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों का भविष्य भी सुरक्षित होता है। *प्रवासी पक्षियों का सुरक्षित आश्रय* कोपरा जलाशय हजारों प्रवासी पक्षियों के लिए सुरक्षित ठिकाना बन चुका है। हर वर्ष विभिन्न देशों और राज्यों से आने वाले पक्षी यहां भोजन और विश्राम प्राप्त करते हैं। इसके साथ ही यह जलाशय जलीय जीवों, मछलियों, वनस्पतियों और अनेक सूक्ष्म जीवों के लिए भी महत्वपूर्ण आवास प्रदान करता है। इसी विशेषता के कारण इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण आर्द्रभूमि के रूप में मान्यता मिली है। *स्वच्छता, वृक्षारोपण और बायो-फेंसिंग पर विशेष जोर* स्थानीय ग्रामीणों, महिला स्व-सहायता समूहों, युवाओं और विद्यालयों की सक्रिय भागीदारी से यहां स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, पक्षी संरक्षण और बायो-फेंसिंग जैसे कार्य लगातार किए जा रहे हैं। इन प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलने के साथ लोगों में प्रकृति के प्रति जागरूकता और जिम्मेदारी की भावना भी विकसित हो रही है। *जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी महत्वपूर्ण* विशेषज्ञों के अनुसार आर्द्रभूमियां प्राकृतिक सुरक्षा कवच की तरह कार्य करती हैं। वे बाढ़ नियंत्रण, भूजल पुनर्भरण, जल शुद्धिकरण और कार्बन अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ऐसे में कोपरा जलाशय का संरक्षण जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने में भी बेहद उपयोगी साबित हो रहा है। *सतत विकास का बन रहा राष्ट्रीय मॉडल* कोपरा जलाशय आज यह संदेश दे रहा है कि पर्यावरण संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज की साझा जिम्मेदारी है। स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे-छोटे प्रयास ही वैश्विक स्तर पर बड़े बदलाव की नींव बनते हैं। छत्तीसगढ़ का यह पहला रामसर स्थल आने वाले समय में पर्यावरण संरक्षण, सतत विकास और सामुदायिक सहभागिता का राष्ट्रीय मॉडल बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रकृति का संरक्षण हमारी साझा जिम्मेदारी है। इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण और इसके वैश्विक महत्व पर मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राज्य के नागरिकों और संरक्षण टीम की सराहना करते हुए अपना संदेश दिया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि कोपरा जलाशय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रामसर स्थल की मान्यता मिलना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय है। हमारी सरकार जैव विविधता संरक्षण, आर्द्रभूमि के विकास और पर्यावरण संतुलन को मजबूत करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। कोपरा जलाशय इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि जब शासन की नीतियां और समाज का संकल्प एक साथ मिलते हैं, तो स्थानीय स्तर पर किए गए छोटे प्रयास भी वैश्विक स्तर पर बड़ा बदलाव ला सकते हैं। हमारी समृद्ध प्रकृति ही हमारी आने वाली पीढ़ियों का सुरक्षित भविष्य है।