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दहेज को लेकर अपमान करना सामान्य विवाद नहीं: दिल्ली हाई कोर्ट
May 12, 2026 Source: Civic Sutra
Delhi High Court ने एक अहम फैसले में कहा है कि शादी के बाद महिला को दहेज में कम सामान लाने को लेकर बार-बार ताने देना मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि छोटी गाड़ी, कम सोना या दहेज से जुड़ी अन्य बातों को लेकर लगातार अपमानजनक टिप्पणियां करना किसी महिला के मानसिक स्वास्थ्य और सम्मान को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है। इसलिए ऐसे व्यवहार को सामान्य घरेलू विवाद कहकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
यह मामला एक महिला की संदिग्ध मौत से जुड़ा है, जिसकी शादी के एक साल के भीतर ससुराल की छत से गिरकर मृत्यु हो गई थी। मृतका के पिता ने आरोप लगाया कि शादी के बाद से ही उसकी बेटी को दहेज को लेकर लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था। शिकायत के अनुसार, पति अक्सर ताने देता था कि लड़की के पिता ने बड़ी गाड़ी देने का वादा किया था, लेकिन छोटी गाड़ी के पैसे दिए गए। साथ ही कम सोना देने को लेकर भी महिला को बार-बार अपमानित किया जाता था।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस Swarna Kanta Sharma ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसे पर्याप्त संकेत मौजूद हैं, जो दहेज से जुड़ी मानसिक प्रताड़ना की ओर इशारा करते हैं। अदालत ने माना कि इस तरह के लगातार ताने महिला के लिए मानसिक उत्पीड़न का कारण बन सकते हैं और इसे कानून के तहत क्रूरता माना जाएगा।
हालांकि, हाई कोर्ट ने दहेज हत्या के आरोप को बहाल करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि दहेज हत्या साबित करने के लिए यह दिखाना जरूरी होता है कि महिला को मौत से ठीक पहले दहेज को लेकर प्रताड़ित किया गया था। मौजूदा रिकॉर्ड में ऐसा कोई स्पष्ट सबूत नहीं मिला, जिससे यह साबित हो सके।
इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने पति को राहत देते हुए कहा था कि वह पहले से विधुर था और दो छोटे बच्चों की देखभाल के लिए उसने दूसरी शादी की थी, इसलिए दहेज प्रताड़ना का स्पष्ट मकसद नजर नहीं आता। लेकिन हाई कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति की पारिवारिक परिस्थितियां आरोपों को स्वतः गलत साबित नहीं कर सकतीं। अदालत ने निर्देश दिया कि पति के खिलाफ आईपीसी की धारा 498A के तहत मुकदमे की आगे की कार्रवाई जारी रखी जाए।