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मवेशियों की दयनीय हालत पर हाईकोर्ट नाराज़, मांगा स्पष्टीकरण

May 6, 2026 Source: Civic Sutra

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मवेशियों की दयनीय हालत पर हाईकोर्ट नाराज़, मांगा स्पष्टीकरण
छत्तीसगढ़ में पशु कल्याण को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जिस पर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बिलासपुर जिले के तखतपुर ब्लॉक स्थित लाखासार गौधाम में मवेशियों की दयनीय स्थिति को लेकर मीडिया में आई रिपोर्ट्स के आधार पर अदालत ने स्वतः संज्ञान लिया है। बताया जा रहा है कि यह वही गौधाम है जिसका उद्घाटन करीब दो महीने पहले बड़े स्तर पर किया गया था, लेकिन वर्तमान हालात सरकारी दावों के विपरीत नजर आ रहे हैं। दरअसल, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 14 मार्च को इस गौधाम का उद्घाटन किया था, जो करीब 25 एकड़ में फैला हुआ है। उद्घाटन के दौरान यहां बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए कई घोषणाएं भी की गई थीं, जिनमें प्रशिक्षण भवन के निर्माण के लिए 25 लाख रुपये की स्वीकृति, काऊ कैचर और पशु एम्बुलेंस उपलब्ध कराने जैसी बातें शामिल थीं। हालांकि, हालिया रिपोर्ट्स में इन दावों की वास्तविक स्थिति पर सवाल खड़े हुए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गौधाम में भारी अव्यवस्था फैली हुई है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि मात्र 10×26 फीट के छोटे से शेड में लगभग 205 गायों को रखा गया है। इस स्थिति में मवेशियों के लिए न तो बैठने की पर्याप्त जगह है और न ही सुरक्षित रहने का वातावरण। पशु चिकित्सकों के अनुसार, एक मवेशी के लिए कम से कम 30 से 40 वर्गफुट का ढंका हुआ स्थान होना चाहिए, लेकिन यहां क्षमता से कई गुना अधिक पशु रखे गए हैं। इससे न केवल उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है, बल्कि संक्रमण और वायरस फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है। इस मामले को हाईकोर्ट ने जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए सुनवाई शुरू कर दी है। अदालत ने मवेशियों को इस तरह ठूंसकर रखने पर कड़ी नाराजगी जताई और इसे पशु क्रूरता के रूप में देखा। कोर्ट ने राज्य के पशुपालन विभाग के सचिव को निर्देश दिया है कि वे इस मामले में शपथ पत्र के साथ विस्तृत जवाब प्रस्तुत करें। यह मामला न केवल प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि पशु कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है। अब यह देखना अहम होगा कि सरकार इस पर क्या कार्रवाई करती है और गौधाम की स्थिति में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।