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एक घर में पानी, पूरा गांव प्यासा—खबर का आधा असर
May 1, 2026 Source: Civic Sutra
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र से सामने आई एक खबर ने एक बार फिर सिस्टम की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जामगुड़ा पंचायत की दिव्यांग महिला दुलमा कश्यप की दर्दनाक स्थिति तब सामने आई जब वह घुटनों के बल रेंगकर पानी लाने को मजबूर थी। इस घटना को मीडिया में उठाए जाने के बाद प्रशासन हरकत में आया और दुलमा के घर तक नल कनेक्शन पहुंचा दिया गया। यह कदम राहत भरा जरूर है, लेकिन इससे एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है—क्या समस्या सिर्फ एक व्यक्ति तक सीमित थी?
दरअसल, दुलमा के घर पानी पहुंचने के बावजूद पूरे जामगुड़ा गांव के हालात अब भी नहीं बदले हैं। गांव के अन्य लोग आज भी पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यानी प्रशासन की कार्रवाई एक प्रतीकात्मक समाधान बनकर रह गई है, जबकि जरूरत पूरे गांव की जल समस्या को स्थायी रूप से हल करने की है।
इसी बीच, जगदलपुर शहर में भी जल संकट की स्थिति गंभीर बनी हुई है। भीषण गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और कई इलाकों में पानी की कमी महसूस की जा रही है। दूसरी ओर, लाल चर्च, अग्रसेन चौक और सिटी कोतवाली के पास पाइपलाइन फूटने से हजारों लीटर पानी सड़कों पर बहकर बर्बाद हो रहा है। स्थानीय लोगों ने इसकी शिकायत भी की, लेकिन मरम्मत में देरी ने समस्या को और बढ़ा दिया।
नगर निगम के अनुसार, यह पाइपलाइन अमृत मिशन योजना के तहत बिछाई गई है और फिलहाल इसकी टेस्टिंग चल रही है। अधिकारियों का कहना है कि जहां-जहां पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हुई है, वहां सुधार कार्य जारी है।
शहर की जल व्यवस्था को सुधारने के लिए नयामुंडा स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का निरीक्षण भी किया गया, जिसमें महापौर और निगम के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। निरीक्षण के दौरान जल शुद्धिकरण और वितरण प्रणाली की समीक्षा की गई। महापौर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि नागरिकों को स्वच्छ और नियमित पेयजल उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए और किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
कुल मिलाकर, यह मामला दिखाता है कि समस्या का आंशिक समाधान नहीं, बल्कि व्यापक और स्थायी सुधार की जरूरत है, ताकि हर नागरिक तक पानी की सुविधा समान रूप से पहुंच सके।