Wednesday, October 21, 2026
English edition Join Group Now

Chhattisgarh

अपने भीतर के काम, क्रोध, मद और लोभ रूपी रावण का वध करना ही विजयादशमी की वास्तविक सार्थकता : मुख्यमंत्री साय

October 21, 2026 Source: Civic Sutra

Join Now
अपने भीतर के काम, क्रोध, मद और लोभ रूपी रावण का वध करना ही विजयादशमी की वास्तविक सार्थकता : मुख्यमंत्री साय
अपने भीतर के काम, क्रोध, मद और लोभ रूपी रावण का वध करना ही विजयादशमी की वास्तविक सार्थकता : मुख्यमंत्री साय
अपने भीतर के काम, क्रोध, मद और लोभ रूपी रावण का वध करना ही विजयादशमी की वास्तविक सार्थकता : मुख्यमंत्री साय
अपने भीतर के काम, क्रोध, मद और लोभ रूपी रावण का वध करना ही विजयादशमी की वास्तविक सार्थकता : मुख्यमंत्री साय
अपने भीतर के काम, क्रोध, मद और लोभ रूपी रावण का वध करना ही विजयादशमी की वास्तविक सार्थकता : मुख्यमंत्री साय
अपने भीतर के काम, क्रोध, मद और लोभ रूपी रावण का वध करना ही विजयादशमी की वास्तविक सार्थकता : मुख्यमंत्री साय
अपने भीतर के काम, क्रोध, मद और लोभ रूपी रावण का वध करना ही विजयादशमी की वास्तविक सार्थकता : मुख्यमंत्री साय
रायपुर, 20 अक्टूबर 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक रावणभाठा मैदान में आयोजित विजयादशमी उत्सव में शामिल हुए। उन्होंने प्रदेशवासियों को विजयादशमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व अधर्म पर धर्म, असत्य पर सत्य, अन्याय पर न्याय और बुराई पर अच्छाई की विजय का शाश्वत संदेश देता है। विजयादशमी हमें अपने जीवन में सत्य, धर्म, न्याय और मानवता के मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा देती है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि हम प्रतिवर्ष रावण का पुतला दहन करते हैं, लेकिन इस पर्व की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब हम अपने भीतर विद्यमान काम, क्रोध, मद और लोभ रूपी रावण का भी वध करें। विजयादशमी आत्ममंथन का अवसर है। यह पर्व हमें अपनी कमजोरियों और बुराइयों पर विजय प्राप्त कर सद्गुणों को अपनाने का संकल्प लेने की प्रेरणा देता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि रायपुर का ऐतिहासिक रावणभाठा मैदान दशहरा उत्सव की लगभग 170 वर्ष पुरानी गौरवशाली परंपरा का साक्षी है। पीढ़ियों से यहां विजयादशमी का पर्व पूरे उल्लास, श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता रहा है। यह मैदान केवल रावण दहन का स्थल नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक एकता और सामूहिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र भी है। उन्होंने इस ऐतिहासिक परंपरा को निरंतर आगे बढ़ाने के लिए आयोजन समिति और इससे जुड़े सभी लोगों की सराहना की। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस अवसर पर रावणभाठा दशहरा उत्सव के आयोजन के लिए प्रतिवर्ष 10 लाख रुपए प्रदान करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक परंपराओं और विरासत का संरक्षण तथा संवर्धन हमारी जिम्मेदारी है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। *प्रभु श्रीराम से छत्तीसगढ़ का आत्मीय और अटूट संबंध* मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ के लिए विजयादशमी का विशेष महत्व है, क्योंकि प्रभु श्रीराम का इस पावन धरती से अत्यंत गहरा और आत्मीय संबंध रहा है। छत्तीसगढ़ माता कौशल्या का मायका और प्रभु श्रीराम का ननिहाल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वनवास काल में भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी ने छत्तीसगढ़ की धरती पर लंबा समय व्यतीत किया। यही कारण है कि प्रभु श्रीराम की स्मृतियां और उनके आदर्श प्रदेश की लोकसंस्कृति, लोकजीवन और जनमानस में गहराई से रचे-बसे हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवन सत्य, मर्यादा, धैर्य, साहस, त्याग और न्याय के प्रति अटूट निष्ठा का अनुपम उदाहरण है। वनवास के दौरान उन्हें अनेक कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कभी धर्म और सत्य का मार्ग नहीं छोड़ा। रावण के पास विशाल सेना, अपार सामर्थ्य और अस्त्र-शस्त्र थे, फिर भी भगवान श्रीराम ने अपने दृढ़ संकल्प और धर्मबल से उसे परास्त किया। यह हमें सिखाता है कि उद्देश्य न्यायपूर्ण हो, संकल्प दृढ़ हो और मार्ग सत्य का हो, तो बड़ी से बड़ी चुनौती पर विजय प्राप्त की जा सकती है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विजयादशमी का सबसे बड़ा संदेश यही है कि सत्य का मार्ग कठिन अवश्य हो सकता है, लेकिन अंततः विजय सत्य की ही होती है। प्रभु श्रीराम का रावण के विरुद्ध संघर्ष केवल एक युद्ध नहीं था, बल्कि अन्याय, अत्याचार और अधर्म के विरुद्ध धर्म एवं मानवीय मूल्यों की स्थापना का महान अभियान था। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के चरित्र की वास्तविक पहचान कठिन परिस्थितियों में होती है। यह महत्वपूर्ण है कि संकट और संघर्ष के समय हम सत्य और न्याय के पक्ष में खड़े होते हैं या नहीं। रावण के साथ मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन भी हमें यही संदेश देता है कि असत्य और अन्याय का साथ देने वाला व्यक्ति चाहे कितना ही सामर्थ्यवान क्यों न हो, उसका अंत निश्चित है। *आतंकवाद और अन्याय के विरुद्ध भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति* मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विजयादशमी का संदेश केवल पौराणिक संदर्भों तक सीमित नहीं है, बल्कि आज भी उतना ही प्रासंगिक है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने आतंकवाद के विरुद्ध अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और सामर्थ्य का परिचय दिया है। भारतीय सेना द्वारा चलाया गया ऑपरेशन सिंदूर देश के साहस, पराक्रम और आतंकवाद के विरुद्ध अडिग संकल्प का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि चाहे पौराणिक काल का रावण हो अथवा आधुनिक युग में आतंकवाद और अन्याय जैसी बुराइयां, समाज और राष्ट्र को इनके विरुद्ध एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए। सत्य और न्याय की रक्षा के लिए दृढ़ संकल्प तथा सामूहिक शक्ति आवश्यक है। *श्रीरामलला का भव्य मंदिर भारत के सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक* मुख्यमंत्री श्री साय ने अयोध्या में भगवान श्रीरामलला के भव्य मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि 22 जनवरी 2024 का दिन भारत के इतिहास में आस्था, सांस्कृतिक गौरव और आध्यात्मिक चेतना के अविस्मरणीय अवसर के रूप में अंकित हो चुका है। सदियों की प्रतीक्षा के बाद प्रभु श्रीरामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हुए। यह क्षण करोड़ों देशवासियों की आस्था, विश्वास और संकल्प की पूर्णता का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़वासियों की प्रभु श्रीराम के प्रति गहरी आस्था और आत्मीय संबंध को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने श्रीरामलला दर्शन योजना प्रारंभ की है। इस योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश के 49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम पहुंचकर प्रभु श्रीरामलला के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। राज्य सरकार का प्रयास है कि अधिक से अधिक श्रद्धालुओं को इस आध्यात्मिक अनुभूति से जुड़ने का अवसर मिले। *अपने भीतर की बुराइयों पर विजय का संकल्प लें* मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों से आह्वान करते हुए कहा कि विजयादशमी केवल रावण के पुतले के दहन का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर की बुराइयों पर विजय प्राप्त करने और सद्गुणों को अपनाने का अवसर है। हमें भगवान श्रीराम के आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज में प्रेम, सद्भाव, भाईचारा, न्याय और सेवा की भावना को और मजबूत करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज छत्तीसगढ़ विकास के नए दौर में आगे बढ़ रहा है। हमारी जिम्मेदारी है कि विकास के साथ अपनी संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों को भी सहेजकर आगे बढ़ें। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प के अनुरूप हम सभी को मिलकर विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करनी है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि आइए, इस पावन विजयादशमी पर हम सभी सत्य, सेवा, सुशासन और जनकल्याण के मार्ग पर चलते हुए एक समृद्ध, सशक्त और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प लें। उन्होंने प्रभु श्रीराम से प्रदेशवासियों के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हुए सभी को विजयादशमी की पुनः हार्दिक शुभकामनाएं दीं। सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि रावणभाठा का दशहरा उत्सव लगभग 170 वर्ष पुरानी गौरवशाली परंपरा है, जिसका आयोजन दूधाधारी मठ द्वारा प्रतिवर्ष किया जाता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है कि देश अपनी प्राचीन विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों को सहेजते हुए विकास के पथ पर आगे बढ़े। उन्होंने माता दुर्गा और प्रभु श्रीराम से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर विधायक श्री सुनील सोनी सहित श्री अंजय शुक्ला, श्री सुभाष तिवारी, श्री मनोज वर्मा, श्री सुशील ओझा, श्री उमेश गुप्ता, श्री संजू नारायण, सार्वजनिक दशहरा उत्सव समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य तथा बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।