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मुख्यमंत्री की पहल से बदली किस्मत, पारूल को मिला जीवनदान

April 28, 2026

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मुख्यमंत्री की पहल से बदली किस्मत, पारूल को मिला जीवनदान
*‘प्रोजेक्ट धड़कन’ से 2 साल की पारूल को मिला नया जीवन* *ब्रेहबेड़ा की नन्हीं बच्ची की सफल हार्ट सर्जरी, अबूझमाड़ से रायपुर तक पहुंची उम्मीद की धड़कन* रायपुर, 25 अप्रैल 2026: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में संचालित ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ ने नारायणपुर के दूरस्थ ब्रेहबेड़ा गांव की 2 वर्षीय पारूल दुग्गा को नया जीवन दिया है। जन्मजात हृदय रोग से ग्रस्त पारूल की रायपुर के श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल में सफल सर्जरी के बाद वह स्वस्थ होकर घर लौट चुकी है।‘प्रोजेक्ट धड़कन’ अब नारायणपुर जिले में योजना भर नहीं, बल्कि उन परिवारों के लिए उम्मीद का नाम बन चुका है जिनके लिए हर नन्हीं धड़कन सबसे कीमती है। *थकान से जूझती थी नन्हीं पारूल* अबूझमाड़ अंचल के ब्रेहबेड़ा गांव की पारूल कुछ समय पहले तक जल्दी थक जाती थी और सामान्य बच्चों की तरह खेल नहीं पाती थी। सीमित संसाधनों के बीच माता-पिता को उसकी गंभीर बीमारी का पता ही नहीं था। *फरवरी 2026 में शुरू हुआ ‘प्रोजेक्ट धड़कन’* नारायणपुर जिले में बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए फरवरी 2026 में ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ की शुरुआत की गई। इसका उद्देश्य आंगनबाड़ी केंद्रों और स्कूलों में बच्चों की हृदय संबंधी जांच कर गंभीर मामलों की शुरुआती पहचान करना है। यह पहल उन सुदूर क्षेत्रों तक पहुंची जहां विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाएं बेहद सीमित थीं। *3000 बच्चों की स्क्रीनिंग, तीन में मिली बीमारी* अभियान के पहले चरण में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने गांव-गांव जाकर 3000 से अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की। तीन बच्चों में हृदय रोग के लक्षण मिले, जिनमें पारूल भी शामिल थी। जानकारी मिलते ही प्रशासन ने तुरंत इलाज की व्यवस्था की। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इन बच्चों को रायपुर स्थित श्री सत्य साईं संजीवनी अस्पताल के लिए रवाना किया। *10 अप्रैल को हुई सफल सर्जरी* रायपुर में विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जांच के बाद पारूल के हृदय में गंभीर समस्या की पुष्टि की। 10 अप्रैल 2026 को उसकी सफल हार्ट सर्जरी की गई। ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों की निगरानी में देखभाल हुई। आज पारूल स्वस्थ है, खेल रही है और परिवार की गोद में नई ऊर्जा के साथ पल रही है। *मील का पत्थर साबित हो रही पहल ‘प्रोजेक्ट धड़कन’* कलेक्टर नारायणपुर ने कहा कि ‘प्रोजेक्ट धड़कन’ का उद्देश्य सिर्फ बीमारी की पहचान नहीं, बल्कि जरूरतमंद बच्चों को समय पर जीवनरक्षक उपचार दिलाना है। उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों के किसी भी बच्चे को स्वास्थ्य सुविधा के अभाव में कठिनाई न हो, इसके लिए प्रशासन लगातार प्रयासरत है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग, चिकित्सकों और मैदानी कर्मचारियों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल बाल स्वास्थ्य सुरक्षा की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही है। आने वाले समय में और अधिक बच्चों की स्क्रीनिंग की जाएगी। *बदलाव की कहानी* पारूल की कहानी सिर्फ एक सफल ऑपरेशन नहीं है। यह उस बदलाव की कहानी है जहां जंगलों-पहाड़ों के बीच बसे गांवों तक संवेदनशील शासन पहुंच रहा है। यह उस भरोसे की कहानी है जिसमें दूरस्थ परिवारों को भी विश्वास है कि उनके बच्चों का भविष्य सुरक्षित हाथों में है।