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मक्का के आसमान में ड्रोन से मचा हड़कंप, हूतियों ने हमले से किया इनकार

September 16, 2026 Source: Civic Sutra

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मक्का के आसमान में ड्रोन से मचा हड़कंप, हूतियों ने हमले से किया इनकार
मक्का की ओर ड्रोन पहुंचने के सऊदी दावे और हूतियों के इनकार ने पश्चिम एशिया में नया सवाल खड़ा कर दिया है. सऊदी ने हमले के पीछे हूतियों का हाथ बताया, लेकिन विद्रोहियों ने धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने से साफ इनकार किया. ऐसे में सवाल है कि मक्का के आसमान तक पहुंचा ड्रोन आखिर किसने भेजा और उसका असली मकसद क्या था? मुसलमानों के पवित्र शहर मक्का पर ड्रोन से हमले की कोशिश की खबर से दुनिया स्तब्ध है.मक्का इस्लाम का सबसे पवित्र स्थल है. यह वह शहर है जहां हर साल लाखों मुसलमान आते हैं. सऊदी अरब की सरकार ने इस घटना के लिए यमन के हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया है. सऊदी अरब ने कहा है कि मंगलवार को सऊदी समय के अनुसार शाम 6:50 बजे मक्का के दक्षिण में इस ड्रोन को सऊदी के एयर डिफेंस सिस्टम ने आसमान में ही नष्ट कर दिया. सऊदी अरब ने इस घटना के लिए हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया है. वहीं सऊदी अरब और यमन की सरकारी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-माल्की ने बुधवार तड़के जारी एक बयान में कहा कि यह हरकत एक 'रेड लाइन' पार करने जैसा था. गठबंधन ने कहा कि हूतियों की यह कोशिश "आतंकवादी हूती मिलिशिया द्वारा किए गए उल्लंघनों के रिकॉर्ड में एक काला धब्बा बनी रहेगी, और इसे लाखों मुसलमानों की भावनाओं को भड़काने की जान-बूझकर की गई हरकत माना जाएगा." सऊदी अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने पैगंबर मोहम्मद के जन्मस्थान के ऊपर हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले ही ड्रोन को रोककर नष्ट कर दिया. पवित्र स्थलों को कोई खतरा नहीं लेकिन हूती विद्रोहियों ने मक्का पर ड्रोन हमले से साफ इंकार किया है. हूती प्रवक्ता ने कहा कि उनके ऑपरेशन सऊदी अरब की तेल केंद्रों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हैं, न कि धार्मिक स्थलों को. समूह ने इस बात पर भी जोर दिया कि "यमन से पवित्र स्थलों को कोई ख़तरा नहीं है." सवाल यह है कि अगर हूतियों ने मक्का की ओर ड्रोन नहीं मारा था तो यमन के बॉर्डर से 1100 किलोमीटर दूर मक्का पर ड्रोन किसने मारा था. पश्चिम एशिया में यह और पेचीदा इसलिए है क्योंकि कई मिलिशिया समूहों के पास ईरानी तकनीक, ट्रेनिंग या हथियारों की सप्लाई से जुड़े नेटवर्क बताए जाते हैं. अमेरिकी (DIA-Defense Intelligence Agency ने भी हूतियों के मिसाइल और UAV इस्तेमाल में ईरानी मूल की तकनीक/हथियारों के सबूतों पर रिपोर्ट प्रकाशित की है. इसी मॉडल का एक ताजा उदाहरण सऊदी की East-West oil pipeline पर हुआ ड्रोन हमला है. इस हमले का स्रोत इराक तक ट्रेस किया गया और उसे ईरान-समर्थित इराकी मिलिशिया से जोड़ा गया. आज की ड्रोन वॉरफेयर में असली चुनौती सिर्फ 'ड्रोन को मार गिराना' नहीं है. उससे बड़ा सवाल है इस फैक्ट को पता लगाना है कि ड्रोन आया कहां से, उसे लॉन्च किसने किया, ऑपरेशन कहां था और उसके पीछे किसका नेटवर्क था? मक्का पर हमले के मामले में सऊदी अरब ने पूरा आरोप हूती विद्रोहियों पर लगाया है, लेकिन हूतियों ने इससे इनकार किया है. 2017 में भी हूतियों ने मक्का पर किया था हमला सऊदी अरब पर ये हमले सऊदी अरब, NATO सदस्य तुर्की और परमाणु शक्ति वाले पाकिस्तान के बीच हुए नए रक्षा समझौते की पहली परीक्षा हैं. लेकिन तुर्की और पाकिस्तान के अधिकारियों ने कहा है कि हूतियों की बढ़ती आक्रामकता के जवाब में मदद के लिए उन्हें सऊदी अरब से कोई अनुरोध नहीं मिला है. मक्का पर ड्रोन हमले की कोशिश की निंदा करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि उनका देश और सऊदी अरब "पूरी मज़बूती से, कंधे से कंधा मिलाकर" खड़े हैं. 57 से ज़्यादा मुस्लिम देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 'ऑर्गनाइज़ेशन ऑफ़ इस्लामिक कोऑपरेशन' ने भी इसकी आलोचना की और कहा कि यह कोशिश "पवित्र स्थलों की पवित्रता" का उल्लंघन है. कर्नल तुर्की अल-मलिकी के अनुसार 2017 में विद्रोहियों द्वारा शहर की ओर बैलिस्टिक मिसाइल दागने के बाद हूतियों द्वारा मक्का पर हमले की यह दूसरी कोशिश थी. हूतियों का ताजा हमला इस बीच सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच टकराव जारी है. हूतियों के प्रवक्ता याह्या सारी ने कहा कि उसके ग्रुप ने खामिस मुसैत एयरबेस पर हमला किया और यानूब में सऊदी पेट्रोलियम कंपनी अरामको को भी टारगेट किया है. सऊदी अरब ने इस हमले पर कुछ नहीं कहा है. F-15 गिराने का दावा हूती विद्रोहियों ने बिना किसी सबूत के दावा किया कि उन्होंने मध्य प्रांत मारिब के ऊपर सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन के F-15 फाइटर जेट को मार गिराया. हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सरी ने यह नहीं बताया कि यह घटना कब हुई. विद्रोही कभी-कभी हमलों का दावा करने में कई दिन लगा देते हैं. सऊदी-नेतृत्व वाले गठबंधन और सऊदी सरकार के प्रवक्ताओं ने इस घटना पर कोई टिप्पणी नहीं की है.