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सस्ती होने के बावजूद नहीं बढ़ रही GLP-1 दवाओं की बिक्री, नितिन कामथ ने बताया कारण

June 26, 2026 Source: Civic Sutra

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सस्ती होने के बावजूद नहीं बढ़ रही GLP-1 दवाओं की बिक्री, नितिन कामथ ने बताया कारण
दुनियाभर में वजन घटाने वाली GLP-1 दवाओं की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है, लेकिन भारत में इनकी मांग उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ पाई है। इस मुद्दे पर जेरोधा के को-फाउंडर नितिन कामथ ने हैरानी जताते हुए कहा कि जेनेरिक GLP-1 दवाएं अब इतनी सस्ती हो चुकी हैं कि कई शहरों में इनकी मासिक लागत जिम मेंबरशिप से भी कम है। इसके बावजूद भारतीय उपभोक्ता इन्हें तेजी से नहीं अपना रहे हैं। नितिन कामथ ने ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि कई दवा कंपनियों ने शुरुआती बिक्री के बड़े लक्ष्य तय किए थे, लेकिन अब कमजोर मांग के चलते वे अपने सेल्स टारगेट में 25 से 30 प्रतिशत तक की कटौती कर रही हैं। कामथ के मुताबिक, सबसे बड़ी चुनौती दवा की कीमत नहीं बल्कि लंबे समय तक इलाज जारी रखना है। GLP-1 दवाएं आमतौर पर हर हफ्ते इंजेक्शन के रूप में दी जाती हैं और वजन नियंत्रित रखने के लिए इन्हें लगातार लेना पड़ता है। ऐसे में कई लोग जीवनभर नियमित इंजेक्शन लेने के लिए तैयार नहीं होते। उन्होंने यह भी माना कि भारतीय डॉक्टर नई दवाएं लिखने में पश्चिमी देशों के डॉक्टरों की तुलना में अधिक सतर्क रहते हैं। इसके अलावा खुद इंजेक्शन लगाने की झिझक और असुविधा भी लोगों को इलाज शुरू करने से रोक सकती है। हालांकि, कामथ का मानना है कि यदि GLP-1 दवाओं के टैबलेट (गोली) वाले विकल्प व्यापक रूप से उपलब्ध हो जाते हैं, तो इनकी स्वीकार्यता तेजी से बढ़ सकती है। आने वाले समय में भारत में इन दवाओं की सफलता केवल कीमत पर नहीं, बल्कि सुविधा, लंबे समय तक इलाज जारी रखने की इच्छा और मोटापे के इलाज को लेकर लोगों की बदलती सोच पर निर्भर करेगी।