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G-7 मीटिंग में सामने आया G2 का नाम, भारत पर क्या असर पड़ेगा...
June 18, 2026 Source: Civic Sutra
हाल ही में G-7 देशों की बैठक के बाद अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक नए शब्द “G-2” का जिक्र किया, जिससे वैश्विक राजनीति में चर्चा तेज हो गई है। ट्रम्प ने पेरिस में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बातचीत के दौरान संकेत दिया कि आने वाले समय में अमेरिका और चीन के बीच “G-2 समिट” हो सकती है, जिसके बाद G-20 देशों के साथ भी बैठक का विचार है।
दरअसल, G-2 कोई आधिकारिक संगठन नहीं है, जैसे G-7 या G-20 हैं। यह सिर्फ एक अनौपचारिक और रणनीतिक अवधारणा है, जिसमें दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ—अमेरिका और चीन—को एक साथ देखा जाता है। इस विचार का कोई औपचारिक ढांचा, दफ्तर या सदस्यता नहीं है।
हालांकि, कूटनीतिक स्तर पर अमेरिका और चीन के बीच होने वाली उच्च-स्तरीय बैठकों को कई बार “G-2” कहा जाता रहा है। लेकिन यह नाम कभी आधिकारिक रूप से स्वीकार नहीं किया गया। हाल ही में ट्रम्प की चीन यात्रा के दौरान भी ऐसी किसी बैठक को औपचारिक रूप से G-2 नहीं कहा गया था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के सितंबर 2026 में वॉशिंगटन जाने की संभावना है। माना जा रहा है कि अगर यह मुलाकात होती है, तो अमेरिका इसे G-2 के रूप में पेश कर सकता है।
भारत के नजरिए से यह विकास महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दक्षिण एशिया में चीन और भारत के बीच पहले से ही रणनीतिक प्रतिस्पर्धा है। वहीं अमेरिका और चीन के रिश्तों में तनाव के कारण भारत को कई बार कूटनीतिक और आर्थिक लाभ मिलता रहा है। लेकिन अगर अमेरिका और चीन के बीच नज़दीकी बढ़ती है या इसे औपचारिक “G-2” जैसा रूप दिया जाता है, तो इसका असर भारत की रणनीतिक स्थिति और क्षेत्रीय संतुलन पर भी पड़ सकता है।
दक्षिण एशिया में चीन और भारत को प्रतिद्वंद्वी देश भी माना जाता है. चीन और अमेरिका के रिश्ते ठीक नहीं रहने के कारण इसका फायदा भारत को मिलता रहा है. अब अगर चीन के साथ अमेरिका जी-2 की मीटिंग करता है तो इसका असर भारत पर भी देखने को पड़ सकता है.