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सीमा सुरक्षा पर मंथन: 8 जून से दिल्ली में आमने-सामने होंगे भारत और बांग्लादेश के DG ...
June 1, 2026 Source: Civic Sutra
भारत और बांग्लादेश के बीच सीमा सुरक्षा और द्विपक्षीय सहयोग से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए 8 से 11 जून के बीच नई दिल्ली में महानिदेशक (DG) स्तर की द्विवार्षिक बैठक आयोजित होने जा रही है। यह बैठक इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि बांग्लादेश में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद दोनों देशों के शीर्ष सीमा सुरक्षा अधिकारियों की यह पहली बड़ी मुलाकात होगी।
बैठक में भारत की ओर से सीमा सुरक्षा बल (BSF) के महानिदेशक प्रवीण कुमार प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे, जबकि बांग्लादेश की ओर से बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के महानिदेशक जनरल मोहम्मद अशरफुज्जमान शामिल होंगे। यह वार्ता दिल्ली स्थित बीएसएफ के एक प्रतिष्ठान में आयोजित की जाएगी।
दोनों देशों के बीच होने वाली इस चर्चा में सीमा सुरक्षा, अवैध घुसपैठ, सीमा पर बाड़ लगाने की प्रक्रिया में तेजी, सीमा पार अपराधों पर रोक और बीएसएफ जवानों पर होने वाले हमलों जैसे महत्वपूर्ण विषयों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। भारत लंबे समय से अवैध प्रवास और सीमा पार गतिविधियों को लेकर अपनी चिंता व्यक्त करता रहा है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी स्पष्ट किया था कि देश में अवैध घुसपैठ को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और ऐसे मामलों में ‘डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट’ (3D) नीति के तहत कार्रवाई की जाएगी।
बैठक के समापन पर 11 जून को दोनों देशों के अधिकारी एक संयुक्त दस्तावेज पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसमें भविष्य की कार्ययोजना और सहमति के बिंदु शामिल हो सकते हैं। इससे पहले अगस्त 2025 में ऐसी बैठक बांग्लादेश की राजधानी ढाका में आयोजित की गई थी।
भारत और बांग्लादेश के बीच लगभग 4,096 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा है। हालांकि, इसमें से करीब 860 किलोमीटर क्षेत्र में अब भी बाड़ लगाना बाकी है। वहीं लगभग 174 किलोमीटर क्षेत्र ऐसा है जहां नदियों, दलदली इलाकों या कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण फेंसिंग संभव नहीं है।
सूत्रों के अनुसार, बांग्लादेश की ओर से सीमा पर उसके नागरिकों की कथित मौतों और बीएसएफ की कार्रवाई से जुड़े मुद्दे भी उठाए जा सकते हैं। इसके अलावा अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की वापसी, सीमा पार तस्करी रोकने, संगठित अपराधों पर नियंत्रण तथा बांग्लादेश में सक्रिय भारतीय विद्रोही संगठनों के खिलाफ कार्रवाई जैसे विषयों पर भी व्यापक चर्चा होने की संभावना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक दोनों देशों के बीच सीमा प्रबंधन को मजबूत करने और सुरक्षा सहयोग को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।