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रिटायरमेंट से पहले ट्रांसफर पर विवाद, हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला

May 31, 2026 Source: Civic Sutra

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रिटायरमेंट से पहले ट्रांसफर पर विवाद, हाईकोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला
बिलासपुर:छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने तबादला आदेश को चुनौती देने वाले एक सरकारी कर्मचारी की याचिका खारिज करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सेवानिवृत्ति के निकट कर्मचारियों को तबादले से सुरक्षा देने वाली नीति केवल उन्हीं मामलों में लागू होती है, जहां कर्मचारी की सेवा अवधि एक वर्ष या उससे कम शेष हो। मामला वन विभाग के अधिकारी **उत्तम प्रसाद पैकरा** से जुड़ा है। पैकरा जनकपुर में वन उप-मंडल अधिकारी के पद पर कार्यरत थे और वर्ष 2026 में सेवानिवृत्त होने वाले थे। जून 2025 में उनका तबादला जिला संघ में उप-प्रबंध निदेशक के पद पर कर दिया गया था। उन्होंने दावा किया कि यह तबादला केवल दूसरे अधिकारी को उसके गृह जिले में पदस्थ करने के उद्देश्य से किया गया था। कोर्ट के निर्देश पर वरिष्ठ सचिवों की समिति के समक्ष मामले की सुनवाई हुई थी। समिति के समक्ष पक्ष रखने के बाद विभाग ने दोनों अधिकारियों के तबादला आदेश निरस्त कर उन्हें उनकी मूल पदस्थापना पर वापस भेज दिया था। हालांकि, दूसरे अधिकारी ने राज्य सरकार के इस निर्णय को हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में चुनौती दी। सिंगल बेंच ने राज्य शासन के आदेश को निरस्त कर दिया था। सिंगल बेंच के फैसले के खिलाफ उत्तम प्रसाद पैकरा ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की। उन्होंने तर्क दिया कि दूसरे अधिकारी की नियुक्ति उसके गृह जिले में की गई थी, जो सामान्य प्रशासन विभाग के दिशा-निर्देशों के विपरीत है। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि वह संबंधित अवधि में मेडिकल अवकाश पर थे और बाद में पुनः कार्यभार ग्रहण कर चुके थे। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद डिवीजन बेंच ने कहा कि जब तबादला आदेश जारी किया गया था, उस समय याचिकाकर्ता की सेवा अवधि लगभग एक वर्ष चार माह शेष थी। इसलिए तबादला नीति का वह प्रावधान, जो सेवानिवृत्ति के करीब कर्मचारियों को विशेष संरक्षण देता है, इस मामले में लागू नहीं होता। अदालत ने अपने फैसले में यह भी दोहराया कि तबादला और पदस्थापना सरकारी सेवा का सामान्य हिस्सा हैं। जब तक यह साबित न हो कि तबादला दुर्भावना से किया गया है या किसी वैधानिक नियम का उल्लंघन हुआ है, तब तक कोई भी कर्मचारी किसी विशेष स्थान पर पदस्थ रहने का अधिकार नहीं जता सकता। इन्हीं टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के फैसले को बरकरार रखते हुए उत्तम प्रसाद पैकरा की अपील खारिज कर दी।