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कैपिटल हिल केस में ट्रंप को बड़ा नुकसान, कैनेडी सेंटर विवाद में भी हार
May 30, 2026 Source: Civic Sutra
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हाल के दिनों में कानूनी और प्रशासनिक मोर्चे पर दो बड़े झटके लगे हैं। एक तरफ कैपिटल हिल हमले से जुड़े मामलों में प्रस्तावित मुआवजा फंड पर अदालत ने अस्थायी रोक लगा दी है, वहीं दूसरी ओर वाशिंगटन की एक संघीय अदालत ने कैनेडी सेंटर से ट्रंप का नाम हटाने का आदेश जारी किया है।
पहला मामला उस विवादास्पद फंड से जुड़ा है, जिसे ट्रंप प्रशासन ने कथित सरकारी उत्पीड़न और राजनीतिक कारणों से निशाना बनाए गए लोगों को राहत देने के उद्देश्य से बनाने की घोषणा की थी। इस फंड का आकार करीब 1.8 अरब डॉलर बताया गया है। हालांकि आलोचकों का आरोप है कि इस योजना का लाभ उन लोगों तक भी पहुंच सकता है, जिनका संबंध 6 जनवरी 2021 को अमेरिकी संसद भवन (कैपिटल हिल) पर हुए हमले से रहा है।
वर्जीनिया के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट की संघीय जज लियोनी ब्रिकेंमा ने इस फंड की स्थापना और संचालन पर अस्थायी रोक लगाते हुए कहा कि अदालत मामले की विस्तृत सुनवाई पूरी होने तक प्रशासन कोई नया कदम नहीं उठा सकता। अदालत ने यह रोक फिलहाल 12 जून तक लागू रखने का आदेश दिया है। हालांकि अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा है कि उसे इस योजना की कानूनी वैधता पर पूरा भरोसा है और सरकार अपने निर्णय का बचाव करेगी।
यह फंड मूल रूप से ट्रंप के टैक्स रिकॉर्ड लीक होने से जुड़े विवाद के समाधान के तहत प्रस्तावित किया गया था। लेकिन इसकी घोषणा के बाद राजनीतिक और कानूनी बहस तेज हो गई। कई आलोचकों और कुछ रिपब्लिकन नेताओं ने भी सवाल उठाया कि करदाताओं के पैसे का इस्तेमाल ऐसे लोगों के लिए नहीं होना चाहिए, जो कैपिटल हिल हिंसा जैसे गंभीर मामलों से जुड़े रहे हों।
उधर, ट्रंप को दूसरा झटका कैनेडी सेंटर से जुड़ी कानूनी लड़ाई में लगा। वाशिंगटन की संघीय अदालत ने स्पष्ट किया कि कैनेडी सेंटर जैसे राष्ट्रीय सांस्कृतिक संस्थान का नाम बदलने का अधिकार केवल अमेरिकी कांग्रेस के पास है। अदालत ने ट्रंप प्रशासन को 14 दिनों के भीतर परिसर से ट्रंप नाम वाले सभी साइनबोर्ड हटाने का निर्देश दिया है।
यूएस डिस्ट्रिक्ट जज क्रिस्टोफर कूपर ने यह भी आदेश दिया कि आधिकारिक दस्तावेजों, प्रचार सामग्री और अन्य सार्वजनिक माध्यमों में “ट्रंप कैनेडी सेंटर” नाम का इस्तेमाल तुरंत बंद किया जाए। इस फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन को कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर नई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
इन दोनों अदालतों के फैसलों ने ट्रंप प्रशासन की योजनाओं और निर्णयों पर सवाल खड़े कर दिए हैं तथा आने वाले दिनों में इन मामलों पर राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।