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हादसा हो या इमरजेंसी, अब याद रखना होगा सिर्फ 112

May 29, 2026 Source: Civic Sutra

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हादसा हो या इमरजेंसी, अब याद रखना होगा सिर्फ 112
देशभर में अलग-अलग इमरजेंसी नंबर याद रखने की परेशानी अब खत्म हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा आदेश देते हुए कहा है कि पूरे भारत में आपातकालीन सेवाओं के लिए केवल एक हेल्पलाइन नंबर 112 को पूरी तरह लागू किया जाए। अदालत ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि अगले तीन महीने के भीतर इस व्यवस्था को पूरी तरह ऑपरेशनल बनाया जाए। यह फैसला ‘सेव लाइफ फाउंडेशन’ की याचिका पर सुनवाई के दौरान आया। कोर्ट ने कहा कि सड़क हादसों और अन्य गंभीर आपात स्थितियों में समय पर मदद मिलना हर नागरिक का संवैधानिक अधिकार है। अभी तक पुलिस के लिए 100, फायर ब्रिगेड के लिए 101, एंबुलेंस के लिए 102 और 108, महिला हेल्पलाइन के लिए 1091 जैसे अलग-अलग नंबर इस्तेमाल किए जाते थे। इससे कई बार लोगों को भ्रम की स्थिति का सामना करना पड़ता था और मदद पहुंचने में देरी होती थी। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि दुर्घटना के समय घायल व्यक्ति सदमे और घबराहट में होता है। ऐसे हालात में हर मिनट बेहद कीमती होता है। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि “तेजी ही जीवनरक्षक दवा है।” कोर्ट के अनुसार, समय पर इलाज और त्वरित सहायता किसी की जान बचाने में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। अदालत ने यह भी माना कि कई लोग सड़क हादसों में घायल लोगों की मदद करना चाहते हैं, लेकिन पुलिस पूछताछ, कोर्ट-कचहरी और कानूनी झंझट के डर से पीछे हट जाते हैं। इसी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों को प्रभावी ‘गुड समैरिटन’ शिकायत निवारण प्रणाली तैयार करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मदद करने वाले नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी और निजी दोनों तरह की एंबुलेंस में आधुनिक तकनीक लागू करने का भी आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि सभी एंबुलेंस को AIS-125 मानकों के अनुसार GPS और Vehicle Location Tracking Device (VLTD) से लैस किया जाए। इन एंबुलेंस को 112 हेल्पलाइन से रियल-टाइम में जोड़ा जाएगा, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत लोकेशन ट्रैक कर मदद भेजी जा सके। कोर्ट ने कहा कि ट्रॉमा के मामलों में समय पर इलाज मिलना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत ‘जीवन के अधिकार’ का हिस्सा है। केंद्र सरकार को मेडिकल रेस्क्यू प्रोटोकॉल जारी करने और राज्यों को उसे सख्ती से लागू करने के निर्देश भी दिए गए हैं। माना जा रहा है कि इस फैसले से देशभर में इमरजेंसी सेवाएं ज्यादा तेज, आसान और प्रभावी बन सकेंगी।