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बंगाल चुनाव ने बढ़ाई BMRCL की मुश्किलें, मेट्रो परियोजना धीमी

May 28, 2026 Source: Civic Sutra

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बंगाल चुनाव ने बढ़ाई BMRCL की मुश्किलें, मेट्रो परियोजना धीमी
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव का असर अब बेंगलुरु की बहुप्रतीक्षित मेट्रो परियोजनाओं पर भी साफ दिखाई देने लगा है। बेंगलुरु मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BMRCL) की पिंक लाइन और ब्लू लाइन के निर्माण कार्य में भारी देरी की आशंका जताई जा रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह पश्चिम बंगाल से जुड़े हजारों प्रवासी मजदूरों का अपने गृह राज्य लौटना और चुनाव खत्म होने के बाद भी वापस काम पर नहीं लौटना बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, चुनाव में मतदान करने के लिए बेंगलुरु से करीब 10 हजार से अधिक मजदूर पश्चिम बंगाल गए थे। ये मजदूर BMRCL की कई अहम परियोजनाओं में काम कर रहे थे। हालांकि मतदान प्रक्रिया समाप्त हुए कई दिन बीत चुके हैं, लेकिन बड़ी संख्या में श्रमिक अभी तक वापस नहीं लौटे हैं। इसका सीधा असर मेट्रो निर्माण की गति पर पड़ा है। BMRCL की पिंक लाइन और ब्लू लाइन परियोजनाएं पहले से ही तय समय सीमा के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया था। पिंक लाइन के छह एलिवेटेड स्टेशनों को जून तक शुरू करने की तैयारी चल रही थी, जबकि 9.75 किलोमीटर लंबे ब्लू लाइन कॉरिडोर को दिसंबर तक जनता के लिए खोलने की योजना बनाई गई थी। लेकिन अब मजदूरों की कमी के कारण इन परियोजनाओं के समय पर पूरा होने पर सवाल खड़े हो गए हैं। मजदूरों की अनुपस्थिति से स्टेशन निर्माण, ट्रैक बिछाने और अन्य तकनीकी कार्य काफी धीमे पड़ गए हैं। कुछ इलाकों में निर्माण कार्य लगभग ठप होने की स्थिति में पहुंच गया है। अधिकारियों का मानना है कि यदि जल्द वैकल्पिक श्रमिकों की व्यवस्था नहीं की गई तो परियोजनाओं में और अधिक देरी हो सकती है। बेंगलुरु लंबे समय से भारी ट्रैफिक समस्या से जूझ रहा है। ऐसे में मेट्रो विस्तार परियोजनाओं में देरी का असर सीधे आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ेगा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकार को इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप करना चाहिए और निर्माण कार्य को तेजी से पूरा करने के लिए जरूरी कदम उठाने चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रवासी मजदूरों पर अत्यधिक निर्भरता के कारण बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट अक्सर ऐसी समस्याओं का सामना करते हैं। फिलहाल BMRCL के सामने सबसे बड़ी चुनौती निर्माण कार्य को दोबारा गति देना और तय समय सीमा को बचाना है।