Friday, June 19, 2026
English edition Join Group Now

India

यमुना बाढ़ क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों पर हाई कोर्ट सख्त, MCD की भूमिका पर सवाल

May 27, 2026 Source: Civic Sutra

Join Now
यमुना बाढ़ क्षेत्र में अवैध कॉलोनियों पर हाई कोर्ट सख्त, MCD की भूमिका पर सवाल
दिल्ली हाई कोर्ट ने राजधानी के यमुना बाढ़ क्षेत्र यानी ज़ोन-O में तेजी से बढ़ रहे अवैध निर्माण को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट कहा कि यमुना खादर क्षेत्र में बनाई जा रही रिहायशी कॉलोनियां पूरी तरह गैरकानूनी हैं और इन्हें किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने इस मामले को पर्यावरण और सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बताते हुए संबंधित एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। सुनवाई के दौरान जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस मनमीत प्रीतम सिंह की खंडपीठ ने कहा कि ताजा अवैध निर्माण एमसीडी इंजीनियरों की निगरानी में हो रहे हैं। अदालत ने इस पर नाराजगी जताते हुए संबंधित एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों के नाम अगली सुनवाई में पेश करने और उन्हें व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहने का आदेश दिया। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि अवैध निर्माण गतिविधियां नहीं रुकीं तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अदालत ने दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) को भी निर्देश दिया कि ज़ोन-O में मरम्मत या रेनोवेशन के नाम पर किसी भी नए निर्माण की अनुमति न दी जाए। कोर्ट ने कहा कि यमुना बाढ़ क्षेत्र पर्यावरणीय रूप से बेहद संवेदनशील इलाका है और यहां अनियंत्रित निर्माण भविष्य में बड़े खतरे पैदा कर सकता है। सुनवाई के दौरान जगतपुर गांव, वजीराबाद, राम घाट और मजनू का टीला स्थित न्यू अरुणा नगर समेत कई इलाकों की तस्वीरें और रिपोर्ट कोर्ट के सामने पेश की गईं। इन तस्वीरों में बड़े पैमाने पर ताजा अवैध निर्माण दिखाई दिए। इस पर अदालत ने टिप्पणी की कि संबंधित सरकारी एजेंसियां आंख मूंदकर बैठी हैं और अवैध निर्माण रोकने में पूरी तरह विफल साबित हुई हैं। केंद्र सरकार ने कोर्ट को जानकारी दी कि फिलहाल ज़ोन-O की 91 अवैध कॉलोनियों को 31 दिसंबर 2026 तक अस्थायी राहत दी गई है। यह राहत ‘नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली लॉ सेकंड एक्ट 2011’ के तहत दी गई है। हालांकि सरकार ने साफ किया कि इसका मतलब वहां रहने वाले लोगों को मालिकाना हक देना नहीं है। केंद्र सरकार के अनुसार, इन 91 कॉलोनियों में लगभग 5 से 6 लाख लोग रह रहे हैं और करीब 1 लाख मकान बने हुए हैं। सरकार ने बताया कि केंद्र, दिल्ली सरकार और अन्य एजेंसियां इन लोगों के पुनर्वास और भविष्य की योजना पर विचार कर रही हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए हाई कोर्ट ने मंत्रालय, MCD और DDA अधिकारियों को 8 जून को बैठक करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने अगली सुनवाई में अवैध कब्जों और नए निर्माण रोकने के लिए उठाए गए कदमों की विस्तृत रिपोर्ट पेश करने को कहा है।