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Politics

पार्टी बदलते ही राघव चड्ढा का राजनीतिक कद बढ़ा, मिली जिम्मेदारी

May 24, 2026 Source: Civic Sutra

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पार्टी बदलते ही राघव चड्ढा का राजनीतिक कद बढ़ा, मिली जिम्मेदारी
आम आदमी पार्टी (AAP) से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को पार्टी ने एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। बीजेपी में शामिल होने के बाद उनका राजनीतिक कद बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। हाल ही में पार्टी ने उन्हें राज्यसभा की याचिका समिति (Petitions Committee) का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह नियुक्ति 20 मई 2026 से प्रभावी मानी जा रही है और इसे राज्यसभा के सभापति द्वारा समिति के पुनर्गठन के तहत मंजूरी दी गई है। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने इस समिति का पुनर्गठन करते हुए कुल दस सदस्यों को इसमें नामांकित किया है। इस नई संरचना में राघव चड्ढा के साथ हर्ष महाजन, गुलाम अली, शंभू शरण पटेल, मयंक कुमार नायक, मस्तान राव यादव बीधा, जे.बी. माथर हिशाम, सुभाषिश खूंटिया, वी. नरजरी और संतोष कुमार पी को सदस्य बनाया गया है। यह समिति संसद की एक अहम स्थायी समिति मानी जाती है, जो जनता द्वारा भेजी गई याचिकाओं पर विचार करती है और उनसे जुड़े मुद्दों की समीक्षा करती है। इसके अलावा लोकसभा से संबंधित एक अलग अधिसूचना में अध्यक्ष ने अरविंद गणपत सावंत को कॉरपोरेट कानून (संशोधन) विधेयक पर संयुक्त समिति में नामित किया है, और यह निर्णय भी 21 मई से प्रभावी हो गया है। याचिका समिति का मुख्य कार्य नागरिकों द्वारा भेजी गई शिकायतों और याचिकाओं की जांच करना होता है। यह समिति उन मामलों पर विचार करती है जो कानूनों, सरकारी नीतियों या प्रशासनिक निर्णयों से जुड़े होते हैं। इसके बाद समिति सरकार को आवश्यक सुझाव और सिफारिशें देती है। इस प्रक्रिया के माध्यम से आम जनता अपनी समस्याओं को सीधे संसद तक पहुंचा सकती है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती मिलती है। राजनीतिक पृष्ठभूमि की बात करें तो राघव चड्ढा पंजाब से आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद चुने गए थे। लेकिन बाद में पार्टी नेतृत्व से मतभेद के चलते उन्होंने 24 अप्रैल 2026 को AAP छोड़ दी। उनके साथ ही पार्टी के दो-तिहाई से अधिक राज्यसभा सांसदों ने भी इस्तीफा देकर बीजेपी का दामन थाम लिया। उस समय राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए थे। वहीं AAP नेताओं ने भी पलटवार करते हुए कहा था कि यह नेता बीजेपी के दबाव में पार्टी छोड़कर गए हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता संजय सिंह ने भी राघव चड्ढा और अन्य बागी सांसदों पर कई गंभीर आरोप लगाए थे। इस पूरे घटनाक्रम के बाद राघव चड्ढा की नई भूमिका और जिम्मेदारी को उनके राजनीतिक करियर में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।