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‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ चैप्टर विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा यू-टर्न

May 22, 2026 Source: Civic Sutra

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‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ चैप्टर विवाद में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा यू-टर्न
NCERT की कक्षा 8 की सोशल साइंस की किताब में शामिल ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ अध्याय को लेकर उठे विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने इस अध्याय को लिखने वाले तीन शिक्षाविदों — Michel Danino, Suparna Diwakar और Alok Prasanna Kumar — की माफी स्वीकार कर ली है। साथ ही, कोर्ट ने अपने पुराने आदेश का वह हिस्सा भी वापस ले लिया है, जिसमें इन शिक्षाविदों को किसी सरकारी संस्था या सरकारी अनुदान प्राप्त संस्थान में काम नहीं देने की बात कही गई थी। यह मामला NCERT की नई सोशल साइंस किताब ‘Exploring Society: India and Beyond Part 2’ से जुड़ा है, जिसे शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए जारी किया गया था। किताब में ‘The Role of the Judiciary in Our Society’ अध्याय के तहत ‘Corruption in the Judiciary’ विषय शामिल किया गया था। इसमें न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, मामलों के लंबित रहने और जजों की कमी जैसी चुनौतियों का उल्लेख किया गया था। इसी अध्याय के एक हिस्से ‘Justice delayed is justice denied’ में सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट और निचली अदालतों में लंबित मामलों के आंकड़े भी दिए गए थे। इस सामग्री को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने पहले कड़ी नाराजगी जताई थी। 11 मार्च को कोर्ट ने कहा था कि अध्याय में तथ्यों को गलत तरीके से पेश कर न्यायपालिका की नकारात्मक छवि दिखाई गई है। इसके बाद संबंधित अध्याय हटाने और किताब की प्रतियों पर रोक लगाने का आदेश दिया गया था। साथ ही तीनों शिक्षाविदों को भविष्य में सरकारी संस्थानों में काम न देने का निर्देश भी दिया गया था। हालांकि बाद में तीनों शिक्षाविदों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा कि उनका कोई गलत इरादा नहीं था और अध्याय की पूरी जिम्मेदारी केवल उन पर नहीं डाली जा सकती। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश Surya Kant, जस्टिस Joymalya Bagchi और जस्टिस Vipul M. Pancholi की बेंच ने मामले पर पुनर्विचार किया। अब सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में बदलाव करते हुए कहा है कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारें, विश्वविद्यालय और सरकारी फंड पाने वाले संस्थान खुद तय करेंगे कि इन शिक्षाविदों को काम देना है या नहीं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी ओर से अब कोई रोक नहीं है। हालांकि केंद्र सरकार ने कहा है कि उसने इन शिक्षाविदों को स्कूली शिक्षा से जुड़े कार्यों में शामिल न करने का निर्णय लिया है।